पासवर्ड
एक प्यारी सी लव स्टोरी — छोटी, मीठी, और किसी को भेजने लायक। ख़ासकर उसे, जिसका नाम आपके पासवर्ड में है।
मिहिर दुनिया का सबसे भुलक्कड़ आदमी था। चश्मा सिर पर रखकर पूरे घर में चश्मा ढूंढता था। और पासवर्ड? पासवर्ड तो उसके लिए किसी दुश्मन की साज़िश थे।
इसलिए घर का सारा डिजिटल राज-पाट तारा संभालती थी। बिजली का बिल, गैस की बुकिंग, बैंक का ऐप — सब उसके हवाले। मिहिर के पास बस एक काम था: महीने में एक बार किसी न किसी अकाउंट का पासवर्ड भूलकर 'Forgot Password' पर क्लिक करना।
शादी के दो साल बाद, एक रविवार, नया फ़ोन सेट करते हुए तारा को मिहिर की पुरानी डायरी मिली। आख़िरी पन्ने पर, टेढ़ी-मेढ़ी लिखावट में, उसके सारे पासवर्ड लिखे थे। तारा हंसी — यह आदमी पासवर्ड डायरी में लिखता है, और डायरी अलमारी में सबसे ऊपर फेंक देता है।
फिर उसने पासवर्ड पढ़े। और हंसी धीरे-धीरे कहीं और चली गई।
तारीख़ें
ईमेल का पासवर्ड था — Tara14Feb। ठीक है, यह तो समझ आता है। वैलेंटाइन वाला मामला।
बैंक वाला था — Tara22March। बाईस मार्च? शादी की सालगिरह अप्रैल में थी। जन्मदिन जून में। यह तारीख़ क्या थी?
वाई-फ़ाई — Tara9Nov। यूपीआई — Tara17Aug। पुराना कॉलेज वाला ईमेल, जो अब कोई इस्तेमाल नहीं करता — Tara3July।
पांच पासवर्ड, पांच तारीख़ें, और तारा को उनमें से सिर्फ एक समझ आई। रात के खाने पर उसने डायरी मेज़ पर रखी और पूछ ही लिया।
"बाईस मार्च क्या है, मिहिर?"
मिहिर ने दाल के कटोरे से नज़रें नहीं उठाईं। पर उसके कान लाल हो गए — जो हमेशा होते थे, जब वह कुछ छिपा रहा होता था।
भुलक्कड़ आदमी की याददाश्त
बहुत कुरेदने पर, कान और भी लाल करके, मिहिर ने हथियार डाल दिए।
"बाईस मार्च को तुमने मुझे पहली बार चाय बनाकर दी थी। शादी से पहले, जब मैं तुम्हारे पापा से मिलने आया था और बारिश में भीग गया था। अदरक ज़्यादा थी। मैंने ज़िंदगी में उससे अच्छी चाय नहीं पी।"
तारा ने बाकी तारीख़ें गिनाईं। नौ नवंबर?
"तुमने पहली बार मेरा मज़ाक उड़ाया था। ऑटो में। मैंने रास्ता ग़लत बताया था और तुम इतना हंसी थीं कि ऑटो वाले भैया भी हंस पड़े थे। उस दिन मुझे लगा था — इस हंसी के साथ पूरी ज़िंदगी काटी जा सकती है।"
सत्रह अगस्त — पहली बार तारा ने उसे 'मिहिर' की जगह 'मिहू' कहा था। तीन जुलाई — कॉलेज के फेयरवेल में तारा पीली साड़ी पहनकर आई थी, और मिहिर ने उससे बात करने की हिम्मत जुटाने में पूरे चार घंटे लगाए थे। आख़िरी पंद्रह मिनट बचे थे, जब हिम्मत आई थी।
"तुम्हें बिजली का बिल याद नहीं रहता," तारा ने धीरे से कहा। "और यह सब याद है?"
मिहिर ने कंधे उचकाए — "जो चीज़ें भूलने से डर लगता है, आदमी उन्हें पासवर्ड बना लेता है। रोज़ टाइप करता हूं, तो रोज़ याद रहती हैं।"
नया पासवर्ड
उस रात तारा ने अपने फ़ोन का पासवर्ड बदला।
अगली सुबह मिहिर ने देखा, तारा के फ़ोन पर पैटर्न की जगह अब पिन था। उसने आदत से पूछा — "नया पिन क्या है? कहीं लिख लूं, तुम्हें तो पता है मैं…"
तारा ने फ़ोन उसकी तरफ़ बढ़ा दिया — "ख़ुद खोलकर देखो। तारीख़ है। हिंट दूं? उस दिन तुम्हारे कान आज से भी ज़्यादा लाल थे।"
मिहिर ने सोचा। फिर मुस्कुराया। फिर चार अंक दबाए — 0-4-1-1। चार नवंबर। वह दिन, जब उसने पीली साड़ी वाली लड़की से आख़िरकार कहा था — तुमसे एक बात कहनी थी।
फ़ोन खुल गया। "देखा," तारा ने हंसकर कहा, "भुलक्कड़ तो तुम सिर्फ उन चीज़ों में हो, जो भूलने लायक हैं।"
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