हिंदी कहानी · पहला प्यार

नीली साइकिल

पहले प्यार की कहानी वही सुना सकता है, जिसका पहला प्यार पूरा हुआ हो — या फिर वह, जिसे लगता है कि नहीं हुआ। इस घर में दोनों रहते हैं।

"पापा, कहानी।"

आठ साल की मीरा के लिए यह वाक्य नहीं, अदालत का आदेश था। रोहन ने घड़ी देखी — साढ़े नौ। मां बर्तन समेट रही थी, और आज उसके दिमाग़ में कोई राजा-रानी, कोई जादूगर, कोई बोलने वाला तोता नहीं बचा था। तीन साल से रोज़ एक कहानी। स्टॉक ख़त्म हो चुका था।

"आज सच्ची कहानी सुनोगी?" उसने हार कर पूछा।

"सच्ची कहानियां बोरिंग होती हैं।"

"यह वाली नहीं है। यह एक लड़के की कहानी है, जिसके पास एक नीली साइकिल थी, और जिसे सोलह साल की उम्र में पहली बार प्यार हुआ था।"

मीरा ने करवट बदली। रसोई में बर्तनों की आवाज़, ध्यान से सुनो तो, ज़रा धीमी हो गई थी।

सोलह साल और सत्रह पंक्चर

लड़का जिस मोहल्ले में रहता था, वहीं एक लड़की रहती थी — दो गली छोड़कर, पीले दरवाज़े वाले घर में। लड़की ट्यूशन जाती थी शाम पांच बजे, पैदल। और लड़का ठीक पांच बजकर दो मिनट पर अपनी नीली साइकिल निकालता था — बिना किसी काम के, उसी रास्ते पर।

"यह तो पीछा करना हुआ," मीरा ने आपत्ति की।

"नहीं। पीछा करने वाले आगे निकल जाते हैं। यह लड़का कभी आगे नहीं निकला। हमेशा बीस क़दम पीछे, साइकिल इतनी धीमी चलाता था कि गिरने से बचाने के लिए पैडल से ज़्यादा क़िस्मत चाहिए होती थी।"

पूरे एक साल में लड़के ने लड़की से कुल ग्यारह वाक्य बोले। ग्यारह में से नौ में 'नमस्ते' था। बाक़ी दो में मौसम।

फिर बोर्ड परीक्षा आई, और लड़के ने तय किया — रिज़ल्ट वाले दिन कह देगा। रिज़ल्ट आया। लड़का लड़की के घर की तरफ़ चला। हाथ में नीली साइकिल, साइकिल की टोकरी में इमली का पैकेट — क्योंकि एक बार ट्यूशन के रास्ते में लड़की ने अपनी सहेली से कहा था कि उसे इमली पसंद है। लड़के को यह वाक्य दो साल याद रहा।

पीले दरवाज़े पर खड़े होकर लड़के ने ज़िंदगी का सबसे बहादुर काम किया। और लड़की ने बहुत आराम से, बहुत शराफ़त से, 'ना' कह दिया।

"ना?!" मीरा उठकर बैठ गई। "कहानी में ना नहीं होता, पापा!"

"सच्ची कहानियों में होता है। लड़की ने कहा — मुझे पढ़ना है। मेरे घर में लड़का बनकर दिखाओ जितना नंबर आया है, फिर बात करना। दरवाज़ा बंद। लड़का, नीली साइकिल, और इमली का पैकेट — तीनों वापस।"

ऐसी और कहानियां — मुफ्त, ऑफलाइन रोज़ नई कहानियां · FlipFiction ऐप पर
GET IT ONGoogle Play

बारह साल बाद

"फिर?" मीरा ने पूछा। "लड़के ने क्या किया?"

"वही जो लड़की ने कहा था। पढ़ाई। इतनी पढ़ाई कि इमली का स्वाद भूल गया। शहर बदला, नौकरी लगी, नीली साइकिल पुरानी होकर चाचा के लड़के के पास चली गई। और बारह साल बाद, जब घरवालों ने कहा कि अब शादी कर लो, तो लड़का एक रिश्ते वाली मुलाक़ात में जा बैठा — कोट पहनकर, घबराया हुआ, चाय की प्याली हाथ में।"

"और सामने जो लड़की बैठी थी…" रोहन रुका।

"वही थी?!" मीरा की आंखें बड़ी हो गईं।

"वही थी। पीले दरवाज़े वाली। बड़ी हो गई थी, प्रोफ़ेसर बन गई थी, दूसरे शहर आ गई थी। और उसने लड़के को पहचाना नहीं।"

"तो लड़के ने बताया?"

"नहीं।" रोहन मुस्कुराया। "लड़के ने सोचा — जिस लड़की ने सोलह साल के लड़के को 'ना' कहा था, वह अट्ठाईस साल के इस आदमी से मिले बिना यह तय कर ले, यह ठीक नहीं। इस बार इमली नहीं, अपनी पूरी ज़िंदगी लेकर आया हूं। जो है, वही दिखाऊंगा। शादी तय हो गई। लड़के ने कभी नहीं बताया।"

आख़िरी बात, जो लड़के को पता नहीं थी

मीरा लेट गई, पर उसका माथा अब भी सिकुड़ा था। "पापा, यह कहानी अधूरी है। लड़की को कभी पता ही नहीं चला कि यह वही है? यह तो चीटिंग है।"

रसोई की बत्ती बुझी। दरवाज़े पर मीरा की मां खड़ी थी — दुपट्टे से हाथ पोंछते हुए, बहुत पुरानी मुस्कान के साथ।

"चीटिंग नहीं है, बेटा," मां ने कहा। "लड़की को पहले दिन से पता था। कोट पहनकर भी लोग वैसे ही घबराते हैं, जैसे सोलह साल की उम्र में पीले दरवाज़े पर घबराए थे। और चाय की प्याली पकड़ने का तरीक़ा नहीं बदलता।"

रोहन ने पत्नी को ऐसे देखा, जैसे बारह साल पुराना रिज़ल्ट दोबारा खुल गया हो।

"तुम्हें… पता था? तुमने कभी नहीं कहा?"

"तुमने भी तो नहीं कहा।" मां ने मीरा की चादर ठीक की। "और वैसे भी — शादी वाले दिन मैंने अपने सामान में से एक चीज़ तुम्हारी अलमारी में रखी थी। बारह साल में कभी ग़ौर से देखते, तो समझ जाते।"

उस रात, मीरा के सो जाने के बाद, रोहन ने अलमारी खोली। सबसे ऊपर वाले ख़ाने में, साड़ियों के पीछे, एक पुराना टिन का डिब्बा था, जिस पर उसने कभी ध्यान नहीं दिया था।

डिब्बे में इमली का ख़ाली पैकेट था। वही वाला। और उस पर लड़कियों वाली गोल लिखावट में लिखा था — "नंबर अच्छे लाए थे। ग्यारह में से ग्यारह।"

यह कहानी अच्छी लगी?

FlipFiction ऐप पर ऐसी सैकड़ों कहानियां हैं — पहला प्यार, शादी के बाद का रोमांस, दूसरे मौके। हर कहानी 10 मिनट से कम में पूरी, बिल्कुल मुफ्त, ऑफलाइन भी।